शिद्दत से ज़िनसे मुहब्बत किया था
ज़िनके लिये दिल दुआयें दिया था
पता अब चला है दगाबाज थे वो
ज़िनके लिये दिल खुद से लड़ा था
मुहब्बत को जब मेरे रुस्वा किया था
आँखो के आँशू को मैंने पिया था
मिला क्या मेरा दिल तुम्हें तोड़कर
संभाले रखा था ज़िसे जोड़कर
सुन मेरी मुहब्बत ना कोई भरम है
ना कोई सिकवा ना कोई शर्म है
दिल ने तुझे माफ भी कर दिया है
मुहब्बत का इंसाफ भी कर दिया है
दिल ना किसी का अब दुखाईयेगा
मुहब्बत जो की तो निभाईयेगा
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