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सनम चाहिएगा

                
                                                         
                            ना ज्यादा मिले, ना ही कम चाहिएगा
                                                                 
                            
मोहब्बत मुझे, हर कदम चाहिएगा

ना कोई शिकायत, मुझे ज़िन्दगी से
मुझे यार तू, हर जन्म चाहिएगा

शमा जल रही हो, मचल दिल रहा हो
मुझे यार ऐसा, करम चाहियेगा

आँखों से जिसके, बस प्यार झलके
मुझे एक प्यारा, सितम चाहिएगा

ना ज्यादा की चाहत, ना कोई भरम है
जीवन का पक्का नियम चाहिएगा

ऐ मौला मेरे कुछ रहम कर दो नाजिल
मुझे एक सच्चा सनम चाहिएगा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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5 वर्ष पहले

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