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प्यार करता रहा मैं ज़िसे टूट कर

                
                                                         
                            प्यार करता रहा मैं ज़िसे टूट कर
                                                                 
                            
फिर भी दिल में जगह उसके ना मिली

क्या कमी थी मेरी इबादत में बोल
किस वजह से मेरी छीन ली ज़िन्दगी

ना मुरव्वत मुझे ना गिला है कोई
बिन ज़िगर के मैं कैसे जियूँ ज़िन्दगी

मेरी दिल में उठी है अजब तिस्नगी
उसकी जुम्बिश में मुझ को पनाह ना मिली

क्या खता है मेरी मुझको मालूम नहीं
क्या कमी रह गयी बन्दगी में मेरी

ज़िन्दगी अब मेरी धोखा बन गयी
ज़िसको चाहा था मेरा हुआ ही नहीं

जा तुझे तेरी खुशियां मुबारक समर
तस्वीर-ए-ज़िन्दगी बदनुमा बन गयी


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6 वर्ष पहले

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