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पढ़त पढ़त पोथी किताब

                
                                                         
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ज्ञान से माथा पूर्ण हुआ
जब देखा दुनिया का सच
दिल टूट के चकनाचूर हुआ

प्रवचन अच्छे अच्छे सुन कर
मादक मन कमज़ोर हुआ
आशिक मिजाज मेरा कलेजा
रो रो के मजबूर हुआ

जबसे सुना है मेहनत से ही
मिलता है हर सुख
तबसे ही खूब घुमाई सपना
मन से मेरे दूर हुआ

हे भगवन, मेरा ध्यान भी रखिये
मन को मेरे शीतल करिये
मोहपाश से दूर रहूँ मैं
प्यार मुझमे बस इतना भरिये

नाम मैं रोशन करके जाऊँ
अपने मात पिता का
दुनिया मे आशीष कमाऊँ
दूर करूँ आलस का

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5 वर्ष पहले

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