क्या है तुम्हारा इस धरती पर
और क्या क्या लेकर जायेगा
खाली हाथ ही आया है जो
क्या वो धन्दा लेकर जायेगा
जब धरती पर जन्म लिया
तुम क्या क्या लेकर आये थे
घर, धन, दौलत कितने सारे
तुमने यहाँ बनायें थे
मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा
क्या कर के तुमने पुन्य किये
याद करो कि कब कब तुमने
मानव धर्म निभाये थे
धरती तो बस उसी की है
ज़िसमे मानवता ज़िन्दा है
वरना मरने के बाद शरीर
मिट्टी का एक फन्दा है
क्या क्या कर्म किये हैं तुमने
लोभ हानि का ध्यान दिये
बच्चों को दी कब ग्यान की दीक्षा
उनको कितने मर्म दिये
झूठ का चोला कब है उतारा
सच का कितना साथ दिये
बच्चों के लिए क्या छोडा विरासत
य़ा मृत्यु के साथ तुम लिए गए
जब नंगे ही धरती आये
और नंगे ही तुम्हे जाना है
फिर लोभ मे पड़कर क्या तुमको
जीवन बदरंग कराना है
ध्यान रखो उपर वाला बस
सदाचार ही देखेगा
मोह, प्यार सच की भट्टी मे
कर्म सही से सेकेगा
पैसा, धन, बल कुछ भी तेरे
कभी काम ना आयेगा
ईश्वर ज़िसको चाहेगा
बस उसे स्वर्ग मे ले जायेगा
लड़ लो मर लो चाहो जो
बस कर्म तुम्हारे परखेगा
गलत करोगे जिसके भी संग
इसी जन्म तुम्हे बख्शेगा
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