आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कर निश्चय आगे बढ़ बन्दे

                
                                                         
                            कर निश्चय आगे बढ़ बन्दे मेहनत का फल लेकर मान
                                                                 
                            
पढ़ लिखकर ज्ञान बढा कर बन कर दिखला तू विद्वान

वही सफल हैं दुनिया में जिसने खुद को पहचाना है
अपने मन की इच्छा से करता जा तू काम महान

कोई काम ना छोटा है , ना कोई काम बड़ा होता है
ज़िसमे मन तेरा रम जाये, वो ही काम सही होता है

सबसे पहले अपने अंदर झांक कर तू देख ले
मन पागल क्या सोचता उससे भी तू पूछ ले

मन लग जाये ज़िसमे तेरा उसमे तू विद्वान बन
कोई कमी रह जाये ना तुझमे ऐसा एक सम्मान बन

विश्व विजेता वही बनेगा जिसने खुद को परखा है
मन की भट्टी को सांचे में रख कर जिसने रगड़ा है

वक़्त की कीमत बहुत बड़ी है इसको ना तू कर बरबाद
वक़्त के साथ चलते हुए कर ले खुद को तू आबाद


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर