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कर लो जी पूरी तैयारी

                
                                                         
                            कर लो जी पूरी तैयारी
                                                                 
                            
आ रहे हैं प्रेम पुजारी
प्रेम की गंगा चहुँओर बहेगी
सत्य की गुंजेगी किलकारी

न्याय का होगा बोलबाला
मुस्कान बनेगी प्यारी प्यारी
मेहनत से सीचेंगे धरती  
महकेगी बगिया की फुलवारी

ख़ुशहाली की बातें होंगी
खुशियों की सौगाते होंगी
अनुशासित जीवन हो सबका
निश्छल मन की यादें होंगी

प्रेम है ईश्वर, प्रेम ही जीवन
प्रेम बिना मानुष है निर्जन
प्रतिघात करे मलिन सोच पर
जीवन कर दे पूरा निर्मल

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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