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इंसान संभल जा थोड़ा

                
                                                         
                            एै इंसान संभल जा थोड़ा,
                                                                 
                            
जलवायु परिवर्तंन देख
मत कर कार्बन उत्सर्जन,
खतरे का तू स्तर देख

सांस भी लेना
हुआ है मुश्किल
जहर घुली हवा मे अब तू,
जीवन की प्रत्याशा देख

हरियाली से ही जग है रोशन,
स्वच्छ हवा का मिलना भी
सुखद हवा से मन हो शीतल
जीवन हो अभिलाषी देख

करती निरोग सबको है ये 
रखे सभी को स्वस्थ
चेहरे पर मुस्कान बिखेरे
काया कर दे मस्त

मानव मे सदबुद्धि लाये
जीवन के प्रति प्रेम जगाये
धरती पर ही स्वर्ग मिले जब
मानव मन से पेड लगाये 
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3 वर्ष पहले

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