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हुई बीबी से लड़ाई

                
                                                         
                            हुई बीबी से लड़ाई
                                                                 
                            
पूछा कितनी है कमाई
पैसों का लेखा जोखा
देना ही होगा भाई

अब ऐसा ना चलेगा
हिसाब हो के ही रहेगा
झांसे में मैं नहीं हूँ
असली हूँ मैं लुगाई

वरना वो धमकी देकर
हर रोज बोलती है
बाबू को ले के मैं तो
अब दूर निकल जाऊँ

लोगों की बात में आ
मेरी नींद पूरी खाई
किसने किसे दिया क्या
ये राज उसको चाहिए

सोती नहीं रातों को
बोले प्यार मुझे चाहिए
करती खूब शरारत है वो
पर बोले इकरार मुझे चाहिए

ना बात वो करेगी
ना चीत वो करेगी
नाक सिकुडे़ हुए
स्टाईल मे रहेगी

एक देता हूँ सलाह पर
उसे मानना नहीं है
लोगों की बात का सच
उसे जानना नहीं है

जा जैसे खुश रहे तू
रह लेना यार पूरी
खुशिय़ां भी संग मेरे
रहती बड़ी अधुरी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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