गर्मी इतनी हाये
टेंपर खूब बढ़ाये
ना देकर कोई राहत
आफत खूब बढ़ाये
ना चैन से जीने देती
बस मरघट याद दिलाये
ना सुख से मरने देती
बस हालत ही बिगड़ाये
खूब पसीने से लथपथ कर
बार बार नहलाये
बस ठंड़ा खाना पीना
घर में ही है जीना
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