दिल के कारोबार मे अजब गजब से लफड़े है
इश्क के बाजार मे हम अदने से मोहरें हैं
माना कि इस दुनिया में सब मिलना मुमकिन नही
जालिम इस संसार मे बहुत बहुत से पहरे हैं
उम्मीदों की चाहत के ज़ख्म बहुत ही गहरें हैं
इश्क के मयखाने मे पल पल बदलते चेहरें हैं
इश्क की मासुमियत के खूब सारे नखरे हैं
दिल्लगी मे ज़िन्दगी के खूब सारे खतरें हैं
मुकम्मल इश्क से ही ज़िन्दगी गुलजार है तस्वीर
कमी रह जाती है जो ज़िन्दगी के कचरे कचरे हैं
मोहम्मद तस्वीरूल इस्लाम
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