दादी अम्मा आओ तुम

                
                                                             
                            दादी अम्मा दादी अम्मा
                                                                     
                            
दादी अम्मा आओ तुम
मुझको कथा सुनाओ तुम
कुछ मुझको सिखलाओ तुम
मेरा ज्ञान बढ़ाओ तुम

प्यारी प्यारी सुन्दर मुन्दर
लोरी मुझे सुनाओ तुम
प्यार से मुझको पुच्ची करके
सर मेरा सहलाओ तुम

जब तक नींद से मैं ना जागूँ
पास मेरे रह जाओ तुम
सुन्दर सुन्दर कथा सुनाकर
सीख मुझे दे जाओ तुम

सुन्दर सुन्दर खेल खिलौने
मेरे लिये तो लाओ तुम
खेल अनोखे कैसे खेलूँ
मुझको ये बतलाओ तुम

दूध मुझे पीने को दो तुम
पेट मेरा गुड़ गुड़ करता है
क ख ग घ मुझे पढ़ाकार
मेरा हिन्दी ज्ञान बढ़ाओ तुम

न्नहे न्नहे कदमों से
पर्वत कैसे नापूँगा
सपने सच होने के जादू
को मैं कैसे जाचुंगा

कैसे मैं हीरा बनूँ
माँ बाप की उम्मीदों का
मेरे मन के कौतुहल को
जल्दी से बतलाओ तुम


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X