उनकी आँखों में ड़ूब कर जाना
प्यार में इतना ये नशा क्यूँ है
दो कदम चल पड़े इरादों से
जाना तब इश्क़ में मज़ा क्यूँ है
दौड़ते भागते रहे दिन भर
इश्क़ की ऐसी खुशगवारी में
पता चला है ये अब जाकर
इश्क़ तुमसे बेवजह क्यूँ है
चलो ना दर्द बांट लें अपना
इश्क़ में अच्छा य़ा बुरा क्या है
इश्क़ मे दर्द भी बहुत झेले
हाले दिल इस मर्ज की दवा क्या है
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