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चल हट पियक्कड़ ज़िन्दगी

                
                                                         
                            चल हट पियक्कड़ ज़िन्दगी, तेरी ऐसी की तैसी
                                                                 
                            
पहुचूंगा मैं मंजिल पर, तेरी ऐसी की तैसी
कदम कदम पर कठिनाई, तू मुझसे आकर मिल
ज़िन्दगी की दुस्वारी सुन, तेरी ऐसी की तैसी
पैसों के पीछे दुनिया है, मर मर कर पागल
मन के मैल का किसी पास, नहीं होता कोई हल
सब अपनी अपनी में लगे हैं, करें इकट्ठा बल
ईश्वर बन कर बात हैं करते, तेरी ऐसी की तैसी
प्यार प्यार अब नहीं रहा, सब माया का जंगल
चमड़ी और दमड़ी ही है, अब लोगों का सम्बल
जांत-पाँत में मर मिट जाना, आज का कानून
ऐसे इंसानों से मेल जोल, तेरी ऐसी की तैसी
मरने पर भी सज धज जाता, आज का मानुष
बातें बड़ी बड़ी बतलाता, आज का मानुष
मोबाइल में घुसे पड़े हैं, सच्ची दुनिया से दूर
इंसानों का राम भला, तेरी ऐसी की तैसी
इस धरती के मानुष से, तू दूर रह तस्वीर
सादा सच्चा जीवन जी तू, हो जा अब गंभीर
लड़ जा तू बेईमानों से, डर ना बिलकुल भी
है नहीं ये दुनिया किसी के, बाप की जागीर
अपनो की और अपने दिल की, बात सुन तस्वीर
बुरे लोगों का साथ, तेरी ऐसी की तैसी

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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