बूंद बूंद कर बिखरे मोती
सागर कल कल शोर मचाये
वन्दन करके नील गगन को
खूब यहां सब नाचो गाओ
धरती अम्बर साथ खडे़ हैं
प्यार भरा प्रतिवेदन लेकर
मन के द्वेष को दूर भगा कर
खुशियों की बरसात कराओ
तनिक हमें यह राज बताओ
दिल का सीधा मार्ग दिखाओ
कोलाहल सा मन मे होता
मिलकर सारे कष्ट मिटाओ
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