बेमतलब की बात सुनना
अपने बस की बात नहीं
फिर भी सुननी पड़ती है
ये कमजोरी बरदास्त नहीं
वक़्त बड़ा मरहम होता है
सारे जख्म मिटाता है
जो ज़ितना बरदास्त करे वो
कुन्दन बन कर आता है
गलती हो स्वीकार करो
लोगो का उपकार करो
माफ करो छोटी बुद्धि को
प्यार भरा व्यवहार करो
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