जब उसने कहा मुझे पता नही
जाओ तुम अपनी फिक्र करो
है दर्द बहुत सीने मे दफन
मत जानो तुम बस सब्र करो
क्या तुम्हे पता क्या झेला है
मन मेरा बहुत अकेला है
जीवन के सारे रस हैं खत्म
बस नियति का ही रेला है
न बात करो न पूछो कुछ
जीवन पर लगा मेरे अंकुश
बस मौत सुहानी लगती है
ज़िसकी है एक दूर पहुँच
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