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अटल सत्य

                
                                                         
                            मृत्यु के शैय्या पर सबको सोना है
                                                                 
                            
एक ना एक दिन ये सबपे होना है

किसी को अमरत्व का वरदान नहीं है
जीवन की असली पहचान यही है

कर्म ही मानुष की पहचान बनी है
ईश्वर के द्वारा जग की रचना हुई है

ना धर्म है, ना नाम है, बस कर्म यहां है
ईश्वर का दोषियों से, कोई मर्म नहीं है

सच का मार्ग ही जीवन का सार है
धन बल सब यहां पूरा बेकार है

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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5 वर्ष पहले

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