सही और गलत का फैसला आखिर कौन करता है?
मेरी शर्ट का कलर किसी के लिए सही होगा तो मेरा पहनावा किसी के लिए गलत।
किसी के लिए मेरी स्किन सावली होगी तो किसी के लिए मेरा मुह काला।
ये सही और गलत के बीच में क्या है जो ना ही सही है और ना ही गलत।
और सही नहीं है तो क्यों नहीं है और गलत है तो सही क्या है,
यह सही और गलत का फैसला आखिर कौन करता है।
किसी को खयालो में बसाना सही है क्या, अगर बाहों में कोई और हो।
और जो बाहों में है वो सही नहीं, तो जो खयालो में है वो गलत कैसे।
यह सही और गलत का फैसला आखिर कौन करता है?
अगर चोरी करने की सज़ा मिलती है तो दिल दुखाने की सज़ा भी तो मिलनी चाहिए।
अगर अदालतों में घरों को तोड़ने की सुनवाई की जाती है तो घर तबाह करने की भी तो सज़ा मिलनी चाहिए।
अगर अपनी जेबो को पैसो से भरना गलत है तो किसी एक इंसान को देवता की तरह पूजना सही है क्या?
अगर किसी एक इंसान से दिल खोल कर प्यार करना सही है तो जब वो
किसी और से करता है तो मुझे सही क्यों लगता है।
और वो सही है तो मै गलत क्यों, यह सही और गलत के बीच में कुछ होता भी है क्या?
यह सही गलत और गलत सही इसका फैसला आखिर कौन कर सकता है।
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