आज तुम्हारे आँगन में उत्सव के दीप जले होंगे
नई पहचान के गीतों से छत्तीसगढ़ी स्वर सजे होंगे
तुम्हारी खुशियों में मेरी दुआएँ भी शामिल हैं
तुम्हारी धड़कनों में मेरा भी कुछ अंश शामिल हैं
याद है, कभी एक ही आँगन में पलते थे हम
एक ही मिट्टी की खुशबू से महकते थे हम
नदियों के रास्ते भी तब कितने अपने लगते थे
एक ही धरती के सपने आँखों में पला करते थे
आज नक्शे की एक लकीर से कई रास्ते बदल गए
कुछ नए ठिकाने मिल गए तो कुछ पुराने छूट गए
मगर कैसे अलग कर दूँ उन यादों को तुमसे
जो इतिहास बनके आज भी सांसे लेती हैं मुझमें
यही आशीष,तुम्हारे हिस्से में हर ओर उजालें हों
तुम्हारी हर सुबह और शाम नई उम्मीदों वाले हों
बस इतना याद रखना, मेरे अपने छत्तीसगढ़,
तुम्हारी जड़ों में कहीं मेरा भी अंश पलता है...
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