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पागलों की तरह साथ रहते थे ....

                
                                                         
                            पहले हम आदिमानव थे
                                                                 
                            
सामने वाले को भी आदिमानव ही मानते थे
तब हम नहीं पहचानते थे
क्योंकि हम असभ्य थे
फिर सभ्यताएं बढ़ी
हम इंसान हुए
और पहचानने लगे ..
हिंदू ,मुसलमान , सिक्ख और इसाई
नहीं थे तब हम सभ्य
क्योंकि तब विद्यालय नहीं थे
शायद इसलिए तब वाले
नहीं सीख पाए थे जाति धर्म की राजनीति
तब हम पत्ते लपेटते थे
क्योंकि नहीं बने थे तब कपड़े
इसीलिए शायद तब
नहीं उतारे जाते थे स्त्रियों के कपड़े
तब नहीं बने थे ऐसे अस्पताल
जहां हो सके इलाज मानसिक स्थिति का
इसीलिए शायद हम बिना लड़े
पागलों की तरह साथ रहते थे ....
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5 घंटे पहले

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