मैं जब डूबा तो साहिलों के माइने बदल गए,
हुआ तन्हा तो महफिलों के माइने बदल गए!
जिसे हम वफादार समझते थे कभी अपना,
ज़रा तस्वीर क्या बदली की सब आइने बदल गए!
-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X