जेहनातो के सभी अँधेरे मिटाने में लगे रहते है
जो सोये है हम उनको जगाने में लगे रहते है
अजनबी ही अजनबी के काम आता है यहाँ
अपने लोग तो चेहरे छुपाने में लगे रहते है
किसका क्या जला इससे सियासत को क्या लेना
ये लोग तो बस आग लगाने में लगे रहते है
दोस्ती के एक नयी रिवायत है तेरे शहर में फैज़
दिल मिले न मिले हाथ मिलाने में लगे रहते है
मुहम्मद शहाबुद्दीन
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