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ये कैसा हठ

                
                                                         
                            ये कैसा हठ राजा को असल हाल बताने का
                                                                 
                            
लगा ना दे आरोप कोई तुमपर नाहक सच फैलाने का
घिरा बैठा वो आत्म तुष्टि के बहानों से
फिर लाभ क्या उसे ये मर्मान्तक कथा सुनाने का
इस अँधेरे में भी रचा स्वाँग सबने जगमगाते छलावे का
फिर ये कैसा प्राण एक दिया जलाने का
मुखौटे लगाए बैठे सभी यहाँ
कारण क्या तुम्हारा बोझिल उदास सा ये चेहरा दिखाने का
सच भी बैठा कहीं झूठ का कलंक लिए
फिर तुम्हेंभला शौक़ चढ़ा उसका परचम लहराने का
वो मोहक झूठ में खोया राजा
ना साहस करो उसे कुरूप सत्य बताने का
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एक घंटा पहले

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