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वो बचपन का आँगन

                
                                                         
                            वो बचपन का आँगन नित्य मुझे जगाता है
                                                                 
                            
लाँघ सपनों के परकोटे मिलने नींद में आ जाता है
सूखे पत्ते निश्चल हवा बचपन की
वो भी साथ लिए लाता है
वो शोर भरी अटखेली भी चुपचाप सुनाता है
गाली की कचौड़ी और काँचों के सारे खेल
जाने कैसे बटोरे लिए आता है
बुराई नहीं करता वो तनिक नए आँगन की
वो तो बीते कल का स्वाद चखा जाता है
पेटी बांधे साथ चलो ऐसा नहीं बताता है
सुगंध घोलो उस हवा की इस हवा मे
कह जरा बचपन के सूखे फूल थमा जाता है
बना लो कूँची से इस आँगन को उस जैसा
रंग लो इन दीवारों को उस घर जैसा
थोड़े टूटे बचपन के रंग थमा जाता है
मेरे बचपन का आँगन मुझसे मिलने रोज़ चला आता है
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एक घंटा पहले

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