कई सैलाब आए इस सड़क पर और गुज़र गए
कुछ में सरकारें थीं निशान पर
कुछ में लोग बिसात का मोहरा बन गए
कम ही थे जो सच में लड़े हक़ूक़ के लिए
वो बिरले इतिहास का पन्ना बन गए
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