आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बिंदी..

                
                                                         
                            वो माथे पे जो लगाले बिंदी तो कितनो को घायल कर देगी
                                                                 
                            
वो बिन बिंदी के मेरे दिल पे रोज कहर ढ़ा जाती है
वो रहती है पास मेरे तब नूर अलग ही होता है
खुशी चली जाती है जब दूर अलग वो होता है
उसपे मेरा हक जो होता में उसको पास बैठा लेता
बातों ही बातों  में दिल के सारे राज बता देता।
----डॉ मयंक शर्मा
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर