वो माथे पे जो लगाले बिंदी तो कितनो को घायल कर देगी
वो बिन बिंदी के मेरे दिल पे रोज कहर ढ़ा जाती है
वो रहती है पास मेरे तब नूर अलग ही होता है
खुशी चली जाती है जब दूर अलग वो होता है
उसपे मेरा हक जो होता में उसको पास बैठा लेता
बातों ही बातों में दिल के सारे राज बता देता।
----डॉ मयंक शर्मा
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