कैसे मुमकिन है तुम बिन मेरा जी पाना
कैसे तुझ बिन दुनिया में आगे बढ़ जाना....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X