आज उसने कह दिया, अब बात नहीं होगी,
मेरे इन हाथों में अब, उसकी सौगात नहीं होगी।
छोड़ कर वो चल दी, मेरे इश्क़ को यूं राहों में,
कह गई कि अब कभी, मुलाक़ात नहीं होगी।
लग रहा है जैसे दुनिया, आज मेरी उजड़ गई,
सांस लेना भी सज़ा है, धड़कनें जैसे ठहर गईं।
एक घुटन सी हो रही है, सीने के हर एक कोने में,
ज़िंदगी मेरी न जाने, किस गली में मुड़ गई।
आंसुओं का सिलसिला, आंखों से थमता ही नहीं,
दर्द ऐसा है कि दिल में, अब सम्भलता ही नहीं।
नींद रूठी है कुछ ऐसे, जैसे दुश्मन हो मेरी,
रात कटती है मगर, ये वक़्त ढलता ही नहीं।
फ़ोन की उस स्क्रीन को, मैं देखता ही रह गया,
एक मैसेज के इंतज़ार में, जागता ही रह गया।
ना कोई पैग़ाम आया, ना ही उसका कुछ जवाब,
मैं अकेला अश्क अपने, पोंछता ही रह गया।
सब खतम सा हो गया है, बस ये धड़कन बाक़ी है,
उसके हिस्से की मेरे, सीने में तड़पन बाक़ी है।
वो चली गई है दूर, सब रिश्ते-नाते तोड़ कर,
मेरी सूनी आंखों में बस, उसका ही सावन बाक़ी है।
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