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बेटी

                
                                                         
                            ज़माने से लड़ने को
                                                                 
                            
हर वक़्त सक्षम रहती थी,
बात भी बड़ी बेबाकी से
और सीधे मुँह पर कहती थी,
सफलताओं को सीढ़ी चढ़ते हुए
हर बार जीत हासिल करती थी,
बड़ी हो गई सोच कर हाथ पीले कर दिए
बहू मेरी अच्छी है ऐसे कह तारीफ़ होती थी,
कोख में ही मार दिया उस अजन्मे मासूम को
और हर रोज घर में किलकारी गूँजे इसकी चाह थी,
जन्म नहीं लेने दिया ना देखने दी दुनिया ये निराली सी
मार दिया उसको क्योंकि उसका बेटी होना ही गलती थी....

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5 वर्ष पहले

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