तुम ज़िंदगी
जी सकते हो
ज़मीन नहीं
बन सकते
ज़मीन मां होती है
अपने कोख से, वह
सतत समृद्धि देती है
यों कहें! वह क्या नहीं देती है
अस्तित्व
अनाज
औषधि
सब-कुछ
हमें देती है
उर्वर ज़मीन के बिना
जीवन की संकल्पना
कल्पना ही हो सकती है
मात्र कल्पना।
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