सूत्रित क्या?
असुत्रित क्या?
हृदय बंधे
मन मिले
बंध बंधे
रिश्ते बने
बिना धागों के
प्रेमसिक्त
स्नेहयुक्त
माया से
समस्त बने
जब-जब
आया विकार
अहंकारों का
टूटे समस्त
गांठें पड़ीं
सरलतम था, जो कभी
अब दुरूह बन गए
गए भाव
शेष रह गईं
शून्य में
सिर्फ औपचारिकताएं !!
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