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स्तुति

                
                                                         
                            नक्षत्र- नवग्रह- नभ से
                                                                 
                            
हो रही मां के स्वरूपों
कि स्तुति गान समवेत
स्वर में, नहीं शेष रहा
धरा का कोई कोना
नहीं हो रही जहां
आराधना- उपासना
गूंज रहे मंत्र एक स्वर में
बज रही करताल एक धुन में
धूप चंदन धमक रहे परिवेश में
सर्वत्र है , एक ही धुन मां के वंदन में
आज आई है , मां चंद्रघंटा
शेर पर सवार हो कर
हे! मां हम करते हैं , तुमसे
एक विनम्र- विनती
भरना तुम सबमें नेह- स्नेह
देना तुम उर में प्रेम भक्ति
धन्य हो जाय यह जग
पाकर तुम्हारी कृपा दृष्टि ।।
पाकर तुम्हारी कृपा दृष्टि ।।

नभ- नक्षत्र- नवग्रहों से
आ रही समवेत संवाद
मां की हो रही सर्वत्र स्तुति- गान
नमन- वंदन है, मां तेरे चरणों में
हे! मां तुम अपने विधान में हमें रखना
वर देना हमें बार- बार
और
जग का करना उद्धार
जग का करना उद्धार।।
-मनोज सिन्हा
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एक वर्ष पहले

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