ये धूप
ये बारिश
ये हवा
ये पानी
मेघ
तारे-सितारे
भास्कर और चांदनी रातें
सब मिले प्रकृति से
सौगातें बेमिसाल !!
परंतु जमाने से क्या मिला मुझे?
ले दे के मेरे
मरासिम थे ,अपने-अपने
उसी में मिले, मुझे
दर्द न जाने कितने?
एक एक कर बताता हूं
ये रिश्ते
ये नाते
ये दिखावे
नफ़रत के सबब
वफ़ादारी की परख
क्या कुछ नहीं मिला मुझे?
हां! देनेवाले लोग!
पराए नहीं
सभी अपने थे
ये ज़िंदगी के सच और
वाक़िफ सारे गम।।
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