भावों में बह कर
भावों से तुम्हें
पाना चाहता हूं
भावना के क्षितिज पर
मन के पंखों से
उड़ान भरकर तुम्हें
पाना चाहता हूं
नींद बनकर
सो रहे हो
न जाने कब से?
स्वप्न बन कर! तुम्हें
जगाना चाहता हूं।
तुम्हारी वेदना को
ह्रदय के प्रेम रस से सींचकर
तुम्हें हरना चाहता हूं
तुम्हारे अवसादों से
भरे तिमिर बंध को
रवि की स्वर्णिम किरणों से
भेदना चाहता हूं
हे देव ! देवों के देव महादेव
भर देना मुझमें
अथाह शक्ति
अपरिमित सा
मैं खोकर भी
तुम्हें पा लेना चाहता हूं
मैं खोकर भी तुम्हें
पा लेना चाहता हूं
पा लेना चाहता हूं।
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