आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सागर से बातें

                
                                                         
                            मैंने पूछा
                                                                 
                            
एक दिन सागर से
तुम! शोर बहुत करते हो
उसने बड़े भोलेपन से कहा
मैं तो ख़ामोश ही रहता हूं
मुझमें मिलने वाली नदियां
मुझमें मिलकर आपस में
अपने मूल से बिछड़ने के दुख
और सागर से मिलने के सुख
से जुड़ी बातें
आपस में करती हैं
मैं तो चुपचाप , मौन होकर
उनकी बातों को सुनता रहता हूं
उनकी बातों को....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर