मिले तुम्हें
जीवन का सरल सार
उर में अंकुरित हो
मधुर मधूप पराग
जब -जब मन का पुष्प
मन में खिले, भर जाए
उसके असीम स्नेह और प्यार।।
मिले तुम्हें
जीवन का सरल सार
चेतन मन हो साकार
विविध भावों में तुम आओ
जीवन में निर्मलता पाओ
झरने का कज्जल -जल
मार्तंड का उज्जवल- प्रकाश
विधु की समस्त प्रभा से तुम भर जाओ
पाओ प्रकृति का सारा सार तत्व
परंतु ! जीवन में न हो सरलता का अंत
परंतु! जीवन में न हो सरलता का अंत।।
मिले तुम्हें
जीवन का सरल सार।।
-मनोज सिन्हा
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