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रूहानियत

                
                                                         
                            जज़्बातों को
                                                                 
                            
अहसासों को
रूहों को
दिल के सौगातों को
महसूस कीजिये
पहले जनाब
फिर पाईये
तरन्नुम का मजा
ज़िंदगी में बेहिसाब
ग़ौरतलब ये होगा
भीड़ से निकालना होगा
ख़ुद से ही
ख़ुद को समझना होगा
ख़ुद को ही॥
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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