जज़्बातों को
अहसासों को
रूहों को
दिल के सौगातों को
महसूस कीजिये
पहले जनाब
फिर पाईये
तरन्नुम का मजा
ज़िंदगी में बेहिसाब
ग़ौरतलब ये होगा
भीड़ से निकालना होगा
ख़ुद से ही
ख़ुद को समझना होगा
ख़ुद को ही॥
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