बन जाना तुम
अनंत का क्षितिज
जहां होगा आकाश
का मधुर मिलन
वसुंधरा से।
एक दीप
जला देना तुम
ना हो सका यदि
तुमसे मृदुल मिलाप
तुम्हारी प्रत्याशा में
प्रज्जवलित प्रकाश से
मिल, पा लूंगा
सानिध्य तुम्हारा।
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