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मुक्ति की प्रतीक्षा

                
                                                         
                            मिट जाना भी
                                                                 
                            
तुम्हारी प्रतीक्षा में
अमरत्व पा जाने जैसा होगा
यदि पहचान तुम्हारी
अक्षुण्ण रह जाय, तो
विरह की ज्वाला में मुझे
होम हो जाना भी
स्वीकार होगा।।

यदि दे दो मुझे आज्ञा
तो बन जाऊंगा
मोम की प्रतिमा
सहर्ष!
फिर रख देना मुझे
तुषाद के संग्रहालय में
वहां पूर्व से रखे
तमाम प्रतिमाओं से भिन्न रहूंगा
क्योंकि मुझे तुम्हारे आने की
प्रतीक्षा रहेगी
तुम्हारे आए बिना
मुझे मुक्ति नहीं होगी।।
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2 वर्ष पहले

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