भावनाओं में बस कर
तेरे साथ चलता हूं
सुख-दुःख की परिधि में
दो बैलों हीरा और मोती
बन रहता हूं, आत्मकथ्य भी
एक दूजे का साथ लिखता हूं
ऐसा कहें! दिखता हूं, बाहर से
अलग अलग, लेकिन
मन के धागों से
मजबूती से, स्वेच्छा से आबद्ध हूं।
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