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मन के धागे

                
                                                         
                            भावनाओं में बस कर
                                                                 
                            
तेरे साथ चलता हूं
सुख-दुःख की परिधि में
दो बैलों हीरा और मोती
बन रहता हूं, आत्मकथ्य भी
एक दूजे का साथ लिखता हूं
ऐसा कहें! दिखता हूं, बाहर से
अलग अलग, लेकिन
मन के धागों से
मजबूती से, स्वेच्छा से आबद्ध हूं।
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2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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