आंखों में कजरी
नभ में बदरी
कहीं खुशी
कहीं कालिमा
भर आई है
मिलन की आस में
उमंग से भरा उर
गगन का सघन अंधकार
अवरुद्ध कर रहा शशि की राह
मानो द्वंद बिछा हो
मन के दर्पण और धुंध के मार्ग
अंततः हारा धुंध
जीता शशि उग कर
शशि प्रभा धरा पे छाई है
अभिराम छाया नैनों में
मिलन की आस में
चंचल हुआ चित
प्राण मिले प्राण से
जीवंत मिलन के भाव से
जीवंत मिलन के भाव से।।
- मनोज सिन्हा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X