मधुमास
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सुखा बुझा रहा
जीवन का श्रृंगार
आया नहीं मधुमास
बैरन रैन पतझड़ का
ले गया खुशियों के
हरे पत्ते, छोड़ गया
गहरा अवसाद
हृदय में
आया नहीं मधुमास
उदास रहा
जीवन का श्रृंगार
बसंत की आस में
वीरान वृक्ष सा
सौंदर्य विहीन
होता जा रहा
कब आओगे?
एक तिथि
बतला दो
प्रतीक्षारत हैं
मेरे दो नयन
हृदय में
संजो कर
तुम्हारी याद
आया नहीं मधुमास
उदास है
जीवन का श्रृंगार।
- मनोज सिन्हा
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