आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मधुमास

                
                                                         
                            मधुमास
                                                                 
                            
-----------
सुखा बुझा रहा
जीवन का श्रृंगार
आया नहीं मधुमास
बैरन रैन पतझड़ का
ले गया खुशियों के
हरे पत्ते, छोड़ गया
गहरा अवसाद
हृदय में
आया नहीं मधुमास
उदास रहा
जीवन का श्रृंगार
बसंत की आस में
वीरान वृक्ष सा
सौंदर्य विहीन
होता जा रहा
कब आओगे?
एक तिथि
बतला दो
प्रतीक्षारत हैं
मेरे दो नयन
हृदय में
संजो कर
तुम्हारी याद
आया नहीं मधुमास
उदास है
जीवन का श्रृंगार।

- मनोज सिन्हा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर