हे! मां विधिप्रिया
हे! मां भारती
स्वतंत्र रव से
परिपूर्ण है भारत आज
नभ धरा
उन्मुक्त स्वछंद है आज
विकास पथ पर
उन्मुख है राष्ट्र आज
मां! भारती से है आस
यह पावस पवित्र धरा
मानस पुत्र पुत्री है आपका
चाह रहा असीम आशीर्वाद माँ
वर दो वर दो वर दो
सुधा कलश ज्ञान का
शिल्प संगीत मान का
तकनीक विज्ञान का
समस्त विद्या का पथ
मां तुम खोल दो
मां तुम खोल दो।।
मां भारती के
चरणों में है
नित्य सुमिरन
नित्य वंदन
कोटि कोटि
का प्रणाम
अर्पित कर रहा
भारती का बालवृंद
स्वीकार माँ कर लो
स्वीकार माँ कर लो
वर दो मां वर दो
वर दो मां वर दो।।
- मनोज सिन्हा
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