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खोया वज़ूद

                
                                                         
                            मुश्किल है
                                                                 
                            
ज़िंदगी को समझाना
मोतियों की माला समान
संयुक्त रहें हम
कई पीढ़ियों तक
सुनहरा इतिहास पड़ा है
काल के नेपथ्य में
बहुत कुछ छूट चुका है
बहुत कुछ जाया गया भुला
पहले गाँव-ज़मीन से टूटा नाता
फिर ज़मीर और सद्भाव छूटा
एक समय था, सब कुछ हमें
ज़मीन देती थी, अनाज और संतोष
उसी ज़मीन ने सदियों तक
और कई पीढ़ियों तक
हमें रखा था जोड़कर
धीरे-धीरे बुजुर्ग निकल गए
फिर हम पढ़-लिख गए
कोई बड़ा अफ़सर बन गया
कई गुमनाम रह गए
अंतर्द्वंद दो पाटों के बीच चलता रहा
और वैचारिक मंथन भी
गाँव की कीमत पर
छोटे-छोटे शहर
महानगर में तब्दील हो गए
साथ ही साथ
महासंयुक्त परिवार
बिखर कर
टूट-टूट कर, चूर हो गए
अपनी पहचान
अपार्टमेंट के एक फ्लैट में
सिमट कर, संकुचित होकर रह गयी
गाँव-कुल-परिवार की पहचान
हमेशा-हमेशा के लिए खो गयी
हमेशा-हमेशा के लिए खो गयी॥
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3 वर्ष पहले

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