कर्म पथ पर
तू चलता जा
कर्म अपने भाग्य का
तू करता जा
कलम और तीर
रख कर अपने तूणीर में
भविष्य अपने हाथों से
तू लिखता जा
शास्त्र और शस्त्र जब
होते साथ- साथ
धर्म वहां होता बहाल
कर्म के हिस्से का अपना कर्म
तू करता जा
कर्म पथ पर
तू चलता जा
कर्म पथ पर
तू चलता जा।।
-मनोज सिन्हा
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