सारी उलझी बातों की कड़ियां
तोड़ती हैं, ह्रदय की लड़ियां
स्मृतियों के सुफल से
उन बातों को जाने दो
हो सके तो तुम
स्मृति-निधि के वन में
सारे भूले-बिसरे कलियों को मुस्काने दो।।
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