सुख-दुःख का पहर
आता जाता हर बार
दे जाता कभी उमंग
तो कभी कभी क्षण भर का विषाद
यह जीवन तो है, आंख- मिचौली
जीवन- रेखा की बदलती रहती है, चित्रित पहेली
जीवन- रेखा की बदलती रहती है, चित्रित पहेली।।
- मनोज सिन्हा
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