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गीतार्थ

                
                                                         
                            मौन में मन बसा
                                                                 
                            
वचन से मिली पहचान
दोनों में जब-जब सामंजस्य हुआ
आदमी बना इंसान।।।

प्रभु हरि! को प्रिय है
संवादों के अनुनाद
दूर करता है यह संवाद
मन में व्याप्त अंधकारों को।।

ज्वलंत प्रमाण बना
गीतार्थ कुरुक्षेत्र में
तब सत्य ने पाया
विजय असत्य पर
तब जाकर पांडवों ने पाया
कौरवों से युद्ध कर निदान।।

गीता से उद्भुत होता है
सुध-बुध हर मन में
गीता के पथ पर चलकर
पाता है, मानव सुमार्ग
जीवन के कठिन डगर में।।
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3 वर्ष पहले

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